पुस्तक समीक्षा – “सरबतिया बी॰ ए॰ एलएल॰ बी॰”

भारत की अदालतों में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में ही लगभग 90,000 मुकदमे, उच्च न्यायालय (High Courts)में लगभग 62 लाख से अधिक मुकदमे, निचली (जिला और अधीनस्थ) अदालतों मे (लगभग 4.9 करोड़) मुकदमे लंबित हैं। यानीकि कुल मिला के 5.49 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं। इनमें लगभग 2,00,000 से अधिक मुकदमे बलात्कार (Rape) और यौन उत्पीड़न से जुड़े हैं। एक वरिष्ठ न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह जी का कहना है कि बलात्कार के के 90% केस झूठे होते हैं। क्योंकि जहाँ एक ओर बलात्कारी मर्द होने के लिये बलिष्ठ या ऊँची पहुँच होना आवश्यक है वहीं दूसरी ओर नकली बलात्कार का मुकदमा करने के लिए सिर्फ़ लड़की होना ही काफ़ी है।

भारत मे इस तरह की घटनायें आम हैं। उदाहरण के लिए बीकानेर के आस-पास महिलाओं/लड़कियों के गैंग हैं। ये लड़कियाँ नकली माँ-बाप-भाई के साथ नकली परिवार का गठन कर एक घर में रहती हैं। युवकों को फँसाती हैं फिर उनपर बलात्कार का केस कर समझौते मे डेढ़ से दो करोड़

वसूलती हैं। जिसमे पुलिस का भी हिस्सा होता है एक एक लड़की द्वारा अपने पर दर्जनों बार बलात्कार का शिकार हो चुकने के मुकदमे कर चुकने के बाद भी पुलिस या प्रशासन उनसे ये सवाल नहीं करता कि ऐसा कैसे संभव है कि आप एक जैसा ही धोखा बार बार खाती हैं। पैसे न चुका पाने वाले लड़कों से जेलें भरी हैं वो वहीं बूढ़े होकर मर भी जा रहे हैं। कमाल का organised crime है जिसमें क्राइम करने के बाद सहानुभूति भी मिलती है। ऐसे ही एक नकली परिवार वाली एक ऐसी लड़की जोकि पुलिस और प्रशासन की मिली भगत से अभी भी इस बलात्कार के धंधे मे लगी हुई है उसी के कारनामे को उजागर करने वाली एक महिला वकील की कहानी है “सरबतिया बी. ए., एलएल. बी.”

इसे कहानी के बजाए हकीकत कहा जाये तो ग़लत न होगा। इसमें स्त्री चरित्र के न सिर्फ़ उन रंगों की, जिनकी आप कल्पना कर सकते हैं बल्कि उनकी भी, जो आपकी सोच से परे हैं। एक ओर अपनी ख़ूबसूरती, छल, फ़रेब और झूठ से, सभी मानव रिश्तों, व मानवता को तार तार करने वाले, अनैतिकता की अकल्पनीय सीमा को भी लाँघ रहे स्त्री चरित्र हैं तो दूसरी ओर बदसूरती की सीमा तक मामूली शक्ल औ सूरत परन्तु अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, बुद्धि और साहस से सफलता,आकर्षण और शक्ति हासिल कर किसी भी अन्याय के विरुद्ध जीत हासिल करने वाला स्त्री चरित्र भी है। सत्य घटनाओं पर आधारित ये उपन्यास किन्हीं रिश्तों की मज़बूती तो किन्हीं के खोखलेपन अदालत की पेचीदा कार्यवाहियों, दुनियाँ की बेरहमी, बेदर्दी के कारण मानव की बेबसी,और लाचारी का आइना है। कहानी आपको झकझोरेगी, सोचने पर मजबूर करेगी और बार-बार यह सवाल उठायेगी कि आखिर ये दुनियाँ किधर जा रही है?

एक झलक देखें – सरबतिया अभी भी डरी सहमी चादर लपेटे पलंग पर बैठी थी। जब जब नरेन्द्र सिंह की उस पर नज़र पड़ती तो गुस्सा और बढ़ता। ये गुस्सा इतना बढ़ा कि वो सरबतिया का नाम ले गन्दी गन्दी गालियाँ बकने लगे। डरी सहमी होने के बावजूद अपमान सहते सहते सरबतिया के सब्र का बांध तब टूट गया जब नरेन्द्र ने उसे गन्दी नाली कह दिया। बस उसके मुँह से भी निकल गया कि

‘मुझे गन्दी नाली कह रहे हो लेकिन जिस गटर मे तुम मुँह मारना चाहते थे उससे तो ये गन्दी नाली बहुत साफ़ सुथरी है।‘

ये सुनते ही क्रोध मे अंधे हो रहे नरेन्द्र मे एक झटके से अपना रिवाल्वर वाला हाथ मुंशी जी के डर से काँपते हाथों से छुड़ाया और सरबतिया की ओर घुमाया। ये देख भावी अनहोनी की आशंका से अच्छू, नरेन्द्र के रिवाल्वर वाले हाथ पर झपटा । लेकिन वो शरीर का संतुलन न बरकरार रख सका और दोनों एक

दूसरे को लिए दिये ज़मीन पर गिर पड़े। तभी गोली चलने की आवाज़ आई, जिससे एक क्षण को सन्नाटा सा हो गया। किसी की समझ मे ही नहीं आया कि दरअसल हुआ क्या ?

(उपन्यास-‘सरबतिया बी॰ ए॰ एलएल॰ बी॰’ से)

“सरबतिया बी ए, एलएल बी” ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम की दुनिया का ऐसा चौंकाने वाला सच है। जिसमें अदालत की चींटी से भी धीमी चाल से रेंगती पेचीदा कार्यवाहियों, पुराने outdated अप्रासंगिक कानून की बेरहमी, बेदर्दी के आगे इन्सान की बेबसी, लाचारी को बेहद सरल व सुगठित भाषा मे सत्य घटनाओं के माध्यम से समझाया गया है। जनसाधारण के साथ साथ वकीलों कानून के छात्रों के लिए भी बेहद उपयोगी, बेहद रोचक सहायक पुस्तक।

डॉ शैलजा चतुर्वेदी

मनोचिकित्सक

Title : सरबतिया बी॰ ए॰ एलएल॰ बी॰;
Author: संजय अग्निहोत्री;
Publisher : Pangram Publishers;
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समीक्षक परिचय

 

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव मे जन्म। लखनऊ विश्वविद्यालय से बी. एससी., एम. बी. बी. एस., एफ़ आर. ए. एनजेड. सी. पी. उपाधियों से सम्मानित डॉ. शैलजा चतुर्वेदी भारतीय और पश्चिमी संस्कृति की पृष्ठभूमि वाली एक योग्य और अनुभवी चिकित्सक हैं। मनोचिकित्सक डॉ चतुर्वेदी की मानव मन की अद्वितीय समझ, उनके अपने कार्यक्षेत्र में लिखी पाँच बेस्टसेलर पुस्तकों के अलावा, हिंदी और अंग्रेजी की विभिन्न पत्रिकाओं मे प्रकाशित उनके लेखों, समीक्षाओं, कहानियों एवं कविताओं मे भी स्पष्ट व मुखर दिखाई देती है।

प्रकाशित पुस्तकें: ‘Raising a Child’, ‘Reflections of a Psychiatrist’, ‘The Global Citizen of India’, ‘A Deranged Mind’ and ‘दुर्गा शक्ति’

सम्प्रति: मानसिक स्वास्थ्य सेवा मे चिकित्सक।

निवास: हन्टर्स हिल्स ऑस्ट्रेलिया।

सम्पर्क: shail150@hotmail.com

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