भारत में रह रहे पाकिस्तान के मुरीदों को 14 अगस्त की मुबारकबाद! | Partition History | Madhu Kishwar

इस वीडियो के माध्यम से मधु किश्वर भारत में रहकर पाकिस्तान के लिए हमदर्दी रखने वालों—विशेषकर Communist Party और RSS के उन नेताओं और वैचारिक पूर्वजों को 14 अगस्त की ढेरों बधाइयाँ दे रही है क्यूँकि उनके राजनीतिक योगदान के बिना जिन्नाह साहब के लिए पाकिस्तान हासिल करना इतना आसान नहीं होता। भारत के विभाजन और पाकिस्तान की माँग में भारतीय कम्युनिस्टों की भूमिका का विश्लेषण दिया गया है।? CPI की 1942 की प्रसिद्ध Adhikari Thesis, Stalin की National Question संबंधी अवधारणाएँ और मुस्लिमों को एक अलग “nationality” मानकर उनके लिए आत्मनिर्णय और अलग राष्ट्र के अधिकार का समर्थन—इन सबका Partition को legitimacy देने में बहुत बड़ी भूमिका रही। इसी संदर्भ में याद आती है कैफ़ी आज़मी के नाम से प्रचलित कथित नज़्म “अगली ईद आज़ाद पाकिस्तान में”। वर्षों से इसे खोजने की कोशिश कर रही हूँ, लेकिन इसका प्रामाणिक पाठ कहीं उपलब्ध नहीं मिला। क्या कैफ़ी साहब ने वास्तव में यह नज़्म लिखी थी? यदि हाँ, तो वह कहाँ है? इसीलिए इस वीडियो के माध्यम से Shabana Azmi से एक विनम्र अपील है: अगर यह नज़्म सचमुच कैफ़ी साहब की है, तो कृपया इसे public domain में उपलब्ध कराइए; और इससे भी बेहतर, अपनी आवाज़ में सुनाइए। और अगर कैफ़ी साहब ने ऐसी कोई नज़्म लिखी ही नहीं, तो भी यह तो झुठलाया नहीं जा सकता कि कैफ़ी आज़मी समेत CPI से जुड़े सभी बुद्धिजीवी और लेखक पाकिस्तान और विभाजन के समर्थक थे. अगर भारत के वे सारे कम्युनिस्ट intellectuals, जिन्होंने भारत के विभाजन और पाकिस्तान की माँग को पुरज़ोर समर्थन दिया, यदि, वे सब के सब स्वयं पाकिस्तान चले गए होते—तो शायद पाकिस्तान आज एक आदर्श secular democracy बन चुका होता! और वहाँ 1947 में विस्थापित हिंदू परिवारों के लिए अपने ancestral homes में लौटने के दरवाज़े खुले होते! क्या कम्युनिस्टों से यह उम्मीद करना ग़लत है?

Author

  • Madhu Purnima Kishwar

    Professor CSDS till 2016,National Professor, ICSSR 2017-19 Senior Fellow, PMML, 2021-23

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