RSS में गोलवलकर और बालासाहब देवरस के घोर मतभेद! 10 साल तक संघ से दूर क्यों रहे देवरस?

RSS में गोलवलकर और बालासाहब देवरस के घोर मतभेद! 10 साल तक संघ से दूर क्यों रहे देवरस? क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के इतिहास में बालासाहब देवरस और गुरु गोलवलकर के बीच वैचारिक मतभेद थे? आखिर ऐसा क्या हुआ कि बालासाहब देवरस लगभग एक दशक तक संघ से अलग रहे? और आपातकाल के दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दो पत्र क्यों लिखे? RSS के इतिहास की इस विशेष श्रृंखला के चौथे एपिसोड में एडवोकेट पुष्कर अग्निहोत्री के साथ हम चर्चा कर रहे हैं बालासाहब देवरस के संघ के साथ संबंधों, उनकी राजनीतिक सोच और उनके कार्यकाल में RSS की बदलती विचारधारा की। इस एपिसोड में चर्चा के प्रमुख विषय:

• गुरु गोलवलकर और बालासाहब देवरस के बीच वैचारिक मतभेद।

• 1952 के पहले आम चुनाव में भारतीय जनसंघ का प्रदर्शन।

• जनसंघ के गठन में RSS और देवरस की भूमिका।

• बालासाहब देवरस लगभग दस वर्षों तक संघ से दूर क्यों रहे

• 1961 में संघ में उनकी वापसी और आगे का राजनीतिक सफर।

• देवरस की विचारधारा: समाजवाद, साम्यवाद और सामाजिक न्याय।

• जातिगत आरक्षण पर बालासाहब देवरस का दृष्टिकोण

• 1977 में गैर-हिंदुओं के लिए RSS के द्वार खोलने की घोषणा।

• आपातकाल के दौरान RSS की भूमिका और इंदिरा गांधी को लिखे गए देवरस के दो पत्र।

• सर्वपंथ समादर मंच और राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का इतिहास।

• आज के RSS और BJP की विचारधारा पर बालासाहब देवरस का प्रभाव।

क्या आज का RSS गुरु गोलवलकर की विचारधारा का विस्तार है या बालासाहब देवरस के दौर में हुए वैचारिक परिवर्तनों का परिणाम? इस ऐतिहासिक चर्चा को सुनिए, तथ्यों को परखिए और अपनी राय हमारे साथ साझा कीजिए। **अतिथि:** एडवोकेट पुष्कर अग्निहोत्री **चैनल:** Manushi India वीडियो पसंद आए तो LIKE करें, Manushi India को SUBSCRIBE करें और इस चर्चा को अपने मित्रों के साथ साझा करें। आपकी प्रतिक्रियाओं और सुझावों का स्वागत है।

Authors

  • Madhu Purnima Kishwar

    Professor CSDS till 2016,National Professor, ICSSR 2017-19 Senior Fellow, PMML, 2021-23

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